शहर की भागदौड़ से दूर, प्रकृति के बीच बैठकर खुद के हाथों से बनाई गई इलायची वाली चाय पीने का जो अहसास है, उसे ही मुसाफिर अपनी भाषा में 'सुकून' कहते हैं।